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एक दिन का महत्व क्या है?

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दिन  के  जन्मदाता  दिनकर,  दिन  का  जन्म  ऊषा  से  दिन  की  जननी  ऊषा  है,  ऊषा  वा  अश्वस्य-अश्वमेघ  विज्ञान  वास्तव  काल  की  महिमा  का  विज्ञान  है,  अतः  अश्वमेघ  यज्ञ  है,  एक  दिन  का  महत्व  ईश्वर  को  समर्पित  है । दिन  का  महत्व भगवान  ही  काल  है,  अनादि  है,  इनका  नाम  अनादि  और  अखंड  है,  अनन्त  है,  इनके  द्वारा  ही  जीव  जगत  प्रगट  से  अव्यक्त  भाव  में  एवं  अव्यक्त  से  व्यक्त  दशा  में  प्रतीत  होता  है । जैसा  भी  प्रतीत  होता  है,  वह  भी  काल  देव  की  रचना  है,  यही  ब्रह्मा  है  रचयिता  यही  विष्णु  है,  य...

पर्यावरण हमारा ध्येय और संकल्प

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पर्यावरण नमस्कार  दोस्तो आज  हम सभी जिन  परिस्थितियों से गुजर  रहे हैं, जो आपदाये झेल  रहे हैं, जैसे कि कहीं-कहीं  भयानक सूखा पड़ना, अत्यधिक बाढ़  आना, बीमारी का प्रकोप, महामारी फैलना,  ये सब पर्यावरण पर दुष्प्रभाव पड़ने का कारण  तो नहीं? जरा  सोचिए?  अगर हम एक  पेड़ नहीं लगा  सकते तो सैकड़ों पेड़-पौधों  को काटने का हक हमें किसने  दिया? किसी ने नहीं, हम पेड़  नहीं, अपनी जिन्दगी, या फिर यों  कहिए हम अपनी आगे आने वाली पीढ़ी  की जड़ों को काट रहे हैं।  ईश्वर  ने जैसे  हमें जीवन  दिया है वैसे  ही इन पेड़-पौधों  को भी, ये हमें आक्सीजन  तो प्रदान ही करते हैं और  साथ-साथ में जीवन की जरूरतों  को भी पूरा करते हैं बदले में  कार्बन डाई ऑक्साइड को अपने में खींच  कर वायु को प्रदूषण मुक्त करते हैं, इस  पर वैज्...

सत्संग का हमारे जीवन पर प्रभाव

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सत्संग का महत्व श्री  राम चरित  मानस में बाबा  गोस्वामी तुलसीदास  जी कहते हैं, चौपाई- बिनु सत्संग विवेक न होई।                  राम कृपा बिनु सुलभ न सोई।। भावार्थ - सत्संग  के बिना विवेक नहीं  होता और श्री राम जी  की कृपा वह सत्संग सहज में  मिलता नहीं । कहने  का तात्पर्य  है, जब तक सत्संग  नहीं करोगे तब विवेक  यानि कि परमज्ञान तत्व  प्राप्त नहीं होगा, और जब  तक श्री राम जी की कृपा नहीं  होगी तब तक हमें सत्संग की प्राप्ति  भी होने बाली नहीं, प्रभु की कृपा कब  होती है, जब हम मोह माया रुपी संसार से  अलग हटकर एकांत में वास करें, निर्मल रूपी  मन को अन्धकार से दूर रखें और ये कब होगा जब  हम सन्तों का सम्मान, उनकी सेवा करें जहाँ सन्त समागम  हो वहां पर जायें उनकी वाणीं को सुनें और उनके एक-एक शब्दों  को अमृत समझकर अपने ...