पर्यावरण हमारा ध्येय और संकल्प

पर्यावरण

नमस्कार  दोस्तो आज  हम सभी जिन  परिस्थितियों से गुजर  रहे हैं, जो आपदाये झेल  रहे हैं, जैसे कि कहीं-कहीं  भयानक सूखा पड़ना, अत्यधिक बाढ़  आना, बीमारी का प्रकोप, महामारी फैलना,  ये सब पर्यावरण पर दुष्प्रभाव पड़ने का कारण  तो नहीं?


जरा  सोचिए?  अगर हम एक  पेड़ नहीं लगा  सकते तो सैकड़ों पेड़-पौधों  को काटने का हक हमें किसने  दिया? किसी ने नहीं, हम पेड़  नहीं, अपनी जिन्दगी, या फिर यों  कहिए हम अपनी आगे आने वाली पीढ़ी  की जड़ों को काट रहे हैं। 





ईश्वर  ने जैसे  हमें जीवन  दिया है वैसे  ही इन पेड़-पौधों  को भी, ये हमें आक्सीजन  तो प्रदान ही करते हैं और  साथ-साथ में जीवन की जरूरतों  को भी पूरा करते हैं बदले में  कार्बन डाई ऑक्साइड को अपने में खींच  कर वायु को प्रदूषण मुक्त करते हैं, इस  पर वैज्ञानिकों ने भी शोध के जरिये पता लगाया  है, यहाँ तक कि हमारे वेद शास्त्रों में भी इसका  प्रमाण मिलता है, फिर भी मनुष्य सब कुछ जानते हुए पेड़-पौधों  जंगलों को काटता जा रहा है।


ऐसा  ही चलता  रहा तो एक  दिन ऐसा आएगा  जब पृथ्वी पर कार्बन  डाई ऑक्साइड के अलावा आक्सीजन  का नामों निशान तक नहीं होगा और  जीव जंतु, पशु पक्षी, मनुष्य जैसे प्राणी  दम घुट-घुट के मरने लगेंगे, दिल और साँस के  मरीज बढेंगे, बीमारी फैलेगी, महामारी का प्रकोप  बढ़ेगा, फिर भी इन मनुष्यों के समझ में नहीं आ रहा  है, क्योंकि आज हम लालच और लोभ में पड़कर इतने अन्धे  होते चले जा रहे हैं कि जंगलों को काट काट कर खेत खलिहानों  में तब्दील कर रहे हैं, हमें कुछ दिखाई ही नहीं पड़ता कि हम क्या  कर रहे हैं? क्या नहीं? अच्छा या बुरा? इसका परिणाम क्या होगा? 



ये  सब सोंच-सोंच  कर मन में ग्लानि  सी होने लगती है, कि  मनुष्य इतना नीचे गिर गया  है और उसकी सोचने-समझने की क्षमता  ही नष्ट गई है उसे यही नहीं मालूम  कि पेड़ कट जानें से वायु मंडल कितना  प्रभावित होगा, वायु परिवर्तन पर कितना असर  पड़ेगा? कहीं-कहीं सूखा पड़ने के आसार बन जायेंगे  और कहीं-कहीं इतनी बारिश होगी कि बाढ़ से तबाही का  कारण भी बनेगी।


इश्वर  ने हमें  भेजा जीव-जंतु,  पेड़-पौधे, पशु-पक्षियों  की रक्षा के लिये लेकिन  हम सब उन्हीं का विनाश कर  रहे हैं मनुष्य कब सुधरेगा? लेकिन  नहीं हमें एक संकल्प लेंना होगा हमें  पेड़ों को कटने रोकना होगा और वन्य प्राणियों  की रक्षा भी करनी होगी तभी हम अपने जीवन को यथार्थ  रूप से बचा पायेंगे।



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