एक दिन का महत्व क्या है?
दिन के जन्मदाता दिनकर, दिन का जन्म ऊषा से दिन की जननी ऊषा है, ऊषा वा अश्वस्य-अश्वमेघ विज्ञान वास्तव काल की महिमा का विज्ञान है, अतः अश्वमेघ यज्ञ है, एक दिन का महत्व ईश्वर को समर्पित है ।
दिन का महत्व
भगवान ही काल है, अनादि है, इनका नाम अनादि और अखंड है, अनन्त है, इनके द्वारा ही जीव जगत प्रगट से अव्यक्त भाव में एवं अव्यक्त से व्यक्त दशा में प्रतीत होता है ।
जैसा भी प्रतीत होता है, वह भी काल देव की रचना है, यही ब्रह्मा है रचयिता यही विष्णु है, यही शंकर, यही अनुभव कर है, यही "गुणा: गुणेषु वर्तते" यही गुणों द्वारा गुणों में प्रवर्त है ।
इन अनन्त काल भगवान महा कालेश्वर का अनन्त ग्रहों पर अपना अपना नाम रूप है ।
इनके अंश ग्रह पृथ्वी पर जो इस पृथ्वी की सारी क्रियाओं और जड़ एवं जीव जगत के आस्तित्व को बनाए हुए हैं, यह भगवान सूर्य साक्षात प्रगट देव हैं ।
यह इस पृथ्वी और पृथ्वी पर उपस्थित जगत के आदि और इति हैं, अतः "आदित्य" इनका प्रथम नाम है, द्वितीय नाम "दिवाकर" है, दिव्य हैं, प्रकाश की हमारी पांचों ज्ञानेन्द्रियों में जो प्रकाश रूप है, वह इन्हीं का नाम "दिवाकर" है ।
तृतीय नाम इनका "भास्कर" है, यह ही हमें जगत की सत्ता का एवं स्वयं की सत्ता का आभास कराते हैं।
चतुर्थ नाम "प्रभाकर" है, जो भी प्रकाश इस विश्व में है, जिन पदार्थों से प्रकाश आता है वह इन्हीं भगवान की कृपा है, यही सहस्रों रूप में प्रति भासित, प्रति दिक्षित हैं, यही त्रेलोक के प्रकाश त्रेलोक्य लोचन हैं, यही हरिद अश्वस्य विश्व के गति का कारण हैं, यही "मार्तण्ड" नाम से कहे जाने बाले इन्हीं का नाम "दिनकर" है ।
यद्यपि काल अनन्त है, परन्तु भगवान सूर्य "स"उरय" वह मेेरे उर: प्रदेेश से पूरे शरीर में गति यानि ऊर्जा का एक प्रकाश देते हुए ह्रदय में अपनी " सेल " युुुनिट रखकर पूूूरे विश्व के जन जीवन को प्रकाश शान्ति और स्पन्दन युक्त रखते हैं, ह्रदय से प्रारम्भ स्यंदन ही शरीर की एक-एक कोशिकाओं को गति और ऊर्जा प्रदान करते हैं ।
अतः उन सूर्य देव के हम सब जीवधारी अंश हैं, इन्हीं की गति और रूप में हम सब प्रकाशित हैं ।
इनके ही एक पक्ष को जो जगत के सामने होता है, दिन कहते हैं, जो पक्ष पश्चांग में होता है, उसे रात्रि कहते हैं, अतः इन दोनों पक्षों के योग को ही एक दिन कहते हैं ।
इस संसार का प्रारम्भ एक दिन ही हुआ होगा, और इसका अंत भी एक दिन होगा ।
मेरा जन्म भी एक दिन हुआ होगा और अन्त या मृत्यु भी एक दिन ही होगी ।
हम पाँच तत्वों में अलग-अलग एक-एक दिन थे, आज पाँच तत्वों में साक्षात के रूप में आज के दिन हैं, हम पिता के शुक्रांणु के रूप में एक दिन थे, हम माता की कोख में स्थापित भी एक दिन हुये थे, और पिता के दुलार एवं माता के प्रेम के रूप में एक दिन थे, हम स्थावर एवं जगत जीवों के रूप में एक दिन थे, और आहार के रूप में एक दिन थे, हम आहार द्वारा ही रस रक्तादि में प्रिकीर्त होकर शुक्रांणु और रज रूप में एक दिन थे, तथातु गर्भाधान में शुक्र एवं रज के मिलान में भी थे ।
मातृनाभि में नवमाष बिताने के बाद जब इस पृथ्वी पर प्रथम बार शिशु जन्म लेकर आये, तब करीब दो किलो भार के थे, अतः आज हम लिख रहे हैं, अगर तो सैंतीस किलो के रूप में हैं, यह सब वही एक-एक दिन का योग है, जन्म दिन से लेकर मरण दिनों तक योग ही आयु है, अतः हमने जीवन में जो भी किया, पाया, खोया है, इसी दिन की महिमा है, जो सम्पूर्ण जीवन में घटित होता है वह एक-एक दिन में घटित होता है पूरी रात्रि अचेतावस्ता में रहकर हमें उस समय की अवस्था का कोई ज्ञान नहीं होता है, इसी प्रकार हमें अपने अतीत में जब हम अव्यक्त थे, उस वक्त का कोई ज्ञान नहीं होता और जब पुनः रात्रि के वक्त निद्रा में हम खो जाते हैं, तो मृत्यु वत हमें कोई ज्ञान नहीं होता है, हम जाग्रत से निद्रा में जानें के लिए व्यग्र होते हैं, तब वह शरीर स्वतः क्लांत होता है, उस समय जाग्रत हमें कतई नहीं सुहाता, यही लघु रूप में मृत्यु की झांकी है ।
जब हम रात्रि में निद्रा से विश्रान्ति प्राप्त करते हैं, शक्ति और स्फूर्ति पाते हैं, जाग्रण की ओर प्रेरित होकर निद्रा रूपी मृत्यु को स्वतः त्याग कर जीवन की ओर प्रस्थान करते हैं, और निशा देवी को मृत्यु देवी की दी हुई शक्ति से जीवन जागरण का रूप, संसार की स्टेज पर मंचन करते हैं, जिस निशा और मृत्यु से हम इतना डरते हैं, वही हमें कितनी पीड़ा, थकान, कुरूपता, अशक्ति से मुक्त करती है, और जीर्णतः एवं जरा (जरा का तात्पर्य, जरासंध के कारागार से है) से मुक्त करती है, और अपनी दी गई शक्तियों को शान्ति से जीवन को आनन्दमयी बनाती है ।
यह एक-एक दिन ही जीवन है, और मृत्यु भी एक दिन जन्म जीवन एवम मृत्यु सब एक-एक दिन प्रकाशमय है, इस एक दिन में जाग्रत रहो, चौकस रहो, सचेष्ट रहो, हर पल हर छण का सदुपयोग करो, तुम्हें मिला है एक दिन इसी में सब कुछ करना है, इसी में सब कुछ होना है।
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